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  लाल हथेलियाँ (नारी-केंद्रित कहानियाँ) : रामदरश मिश्र संपादन : हरिशंकर राढ़ी शताब्दी साहित्यकार प्रो0 रामदरश मिश्र की नारी-केंद्रित कहानियों का संग्रह ‘लाल हथेलियाँ’ दो दिन पहले प्रकाशित होकर आया है। मिश्र जी के साहित्य पर संपादित यह मेरी तीसरी पुस्तक है। मिश्र जी शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है; इस अवसर पर उनकी चुनी हुई नारी-केंद्रित कहानियो का संग्रह लाना मेरे लिए गौरव एवं बड़े आत्मसंतोष की बात है। रामदरश मिश्र जैसे उच्चकोटि के इतने सहज साहित्यकार विरले ही होते हैं, इसलिए उनसे एक आत्मीय जुड़ाव चला आ रहा है। आज इस संग्रह का लोकार्पण मिश्र जी के द्वारका आवास पर अत्यंत सादगी से हुआ। वस्तुतः मिश्र जी का स्वास्थ्य बहुत अच्छा नहीं चल रहा है, आजकल हलका बुखार है। संग्रह के प्रकाशन में भी अपेक्षा से कुछ अधिक समय लग गया था। इसलिए संग्रह के लोकार्पण को बड़ा रूप देने के बजाय आत्मीय ढंग से लोकार्पित कर दिया। इस अवसर पर दिल्ली वि0वि0 में अंगरेजी के एसोशिएट प्रोफेसर डॉ वेदमित्र शुक्ल एवं साहित्य सहयात्री, समकालीन अभिव्यक्ति के संपादक उपेंद्र कुमार मिश्र जी उपस्थित थे। इस अंक में समाहित मिश्र जी की ना...

चुनाव: एक ज्योतिषीय विश्लेषण

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मैंने पहले ही कहा था कि चुनाव पर अपना ज्योतिषीय आकलन मैं मतदान पूरा होने के बाद लिखूंगा। हालांकि यह आकलन कर मैं पहले ही चुका था , लेकिन पत्रकारिता की दुनिया में रहते हुए मैंने यह सीखा है कि जब तक मतदान चल रहे हों , उनके बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं करनी चाहिए। उन बुद्धिजीवियों और निष्पक्ष पत्रकारों की बात छोड़ दीजिए जिन्हें लोकतंत्र केवल तभी तक सुरक्षित दिखता है जब तक कि वह एक कुल विशेष की भारी तशरीफ के नीचे पिसता रहे। एक मित्र के पूछने पर मैंने एक हल्का सा संकेत दिया था तो वह भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की एक एजेंसी में कभी मैनेजर रहे और अब अपने को पत्रकार बताने वाले एक सज्जन को बहुत नागवार गुजर गई। उन्होंने मोदी का दलाल घोषित कर दिया। जब मैंने उनकी बात का तार्किक जवाब दिया तो बेचारे मुझे ब्लॉक करके खिसक लिए।   खैर , आइए अब चुनाव और इसके संभावित परिणाम पर बात करते हैं। चुनाव भारत के हो रहे  हैं , मोदी , या राहुल , या किसी और के नहीं। मोदी या राहुल संभावित प्रधानमंत्री हो सकते हैं , लेकिन इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए नहीं , एक एमपी की हैसियत के लिए लड़ रहे हैं। इसी हैस...
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  'वागर्थ' में कहानी भारतीय भाषा परिषद की प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित होना अच्छा लगता है। 'वागर्थ' के मई, 2024 अंक में मेरी कहानी 'मोड से आगे' आई है। 'वागर्थ' में यह मेरी दूसरी कहानी है, जो स्त्री विमर्श पर केन्द्रित है। इसमें एक नव विवाहिता युवती अपने पति और सास की स्त्री विरोधी, पितृ सत्तात्मक और दहेज लोभी प्रवृत्ति का शिकार होती है और अपना रास्ता खुद चुनती है। कहानी लंबी है और पत्रिका के लगभग 9 पृष्ठों तक चलती है। यहाँ कहानी का लिंक भी साझा कर रहा हूँ। समय मिले तो पढ़ें और टिप्पणी करें। कहानी का लिंक भी साझा कर रहा हूँ। समय मिले तो पढ़ें और टिप्पणी करें। https://vagartha.bharatiyabhashaparishad.org/harishankar.../
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'गिद्धों का स्वर्णकाल' का लोकार्पण आज (16 फरवरी, 2024) एक सुखद एवं संतुष्टिप्रद दिन! विश्व पुस्तक मेला , नई दिल्ली में मेरे ( हरिशंकर राढ़ी) दूसरे व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण 'हंस' प्रकाशन के स्टॉल पर सम्पन्न हुआ। अच्छा लगा जब हिन्दी साहित्य की अनेक विभूतियों द्वारा मेरे व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण सादगी किन्तु गरिमामय ढंग से किया गया। प्रसिद्ध कवि श्री मदन कश्यप जी, कवि एवं पूर्व संपादक (आजकल) श्री राकेशरेणु जी, कवि और लेखक श्री राधेश्याम तिवारी जी, कवि श्री राजेश्वर वशिष्ठ जी, कवि एवं समालोचक श्री ओम निश्चल जी, कवि-हिन्दी सोनेटकार श्री वेदमित्र शुक्ल जी, कवि-ग़ज़लकार श्री नरेश शांडिल्य जी, श्री शिवबदन यादव जी (वरिष्ठ IAS) एवं अनेक आत्मीय जनों ने अपनी उपस्थिति से समारोह को गौरव प्रदान किया। डॉ॰ वेदमित्र शुक्ल जी ने संचालन का दायित्व सहर्ष एवं सफलतापूर्वक संभाला। श्री मदन कश्यप जी, श्री राकेशरेणु जी, श्री ओम निश्चल जी ने संक्षिप्त सम्बोधन में बहुत महत्त्वपूर्ण बातें कहीं। साथ में ही उपेंद्र कुमार मिश्र जी के दूसरे काव्य संग्रह 'लड़ रहा हूँ मैं भी' का लोकार्पण भी साथ...

संसद पर हमला और शहरी नक्सली

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  इष्ट देव सांकृत्यायन
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  एक समृद्ध शाम - हरिशंकर राढ़ी (यह आलेख/ संस्मरण दिनांक 04 अक्टूबर, 2023 को लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्र 'जनसंदेश टाइम्स' में प्रकाशित है) साहित्य मनीषी प्रो. रामदरश मिश्र जी से मिलना हमेशा ही सुखकर , प्रीतिकर एवं ऊर्जस्विता से भरपूर होता है। यह अपना सौभाग्य ही है कि जब मन होता है , मिश्र जी से मिल लिया करता हूँ। हाँ , इतना ध्यान अवश्य रखता हूँ कि उनका स्वास्थ्य ठीक चल रहा हो ; मेरे कारण उन्हें कोई असुविधा न हो। वैसे , उनका स्वभाव ही ऐसा है कि उन्हें किसी से असुविधा नहीं होती , बशर्ते वह भी उनकी उम्र एवं निष्कलुष मानसिकता को समझता हो। डॉ रामदरश मिश्र जी, प्रो स्मिता मिश्र जी, श्री ओम निश्चल जी और बद्री प्रसाद जी  मिश्र जी से मिलने का कोई विशेष कारण नहीं होता। बस जब भी उनके सान्निध्य की व्याकुलता होती है , बात की और चल दिए। बात तो होती ही रहती है। पिछले 15 अगस्त को जब उनका जन्म शताब्दी समारोह प्रारंभ हुआ था , तब से ऊर्जा एवं गर्व का स्तर अपने आप उठ गया है। समारोहों का साक्षी बनने का अपना आनंद है तो अलग से मिलने का अलग। मिश्र जी के कालखंड में होने व मिलते रहने का तात्पर्य ह...
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  समकालीन अभिव्यक्ति : रामदरश मिश्र एकाग्र का लोकार्पण Hari Shanker Rarhi साहित्य मनीषी प्रो. रामदरश मिश्र को पढ़ना, उनसे मिलना और उन पर कुछ लिखना तीनों ही आनंद के स्रोत हैं। ‘समकालीन अभिव्यक्ति’ के तत्त्वावधान में उन पर निकले एकाग्र अंक के पुस्तकाकार रूप का लोकार्पण दिनांक 4 जून, 2023 को मिश्र जी के निवास वाणी विहार पर उन्हीं के हाथों हुआ। अपनी जन्म शताब्दी पूरी करने की देहरी पर खड़े वरिष्ठतम साहित्कार प्रो. रामदरश मिश्र जी के हाथों उन्हीं पर संपादित पुस्तक का लोकार्पण हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है। श्री उपेंद्र कुमार मिश्र एवं मेरे द्वारा संपादित पुस्तक को हंस प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। इसी के साथ प्रो. रामदरश मिश्र पर डॉ. पांडेय शशिभूषण ‘शीतांशु’ द्वारा लिखित आलोचनात्मक पुस्तक ‘रामदरश मिश्र: एक वसंत दिग दिगंत’ का भी लोकार्पण हुआ। अत्यंत आत्मीय-से लोकार्पण समारोह में वरिष्ठ कवि-आलोचक डॉ. ओम निश्चल जी, दिल्ली विश्वविद्यालय में अंगरेजी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वेदमित्र शुक्ल जी, प्रो. मिश्र जी की सुपुत्री और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. स्मिता मिश्र जी एवं हंस प्रकाशन के...

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