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Kanya Kumari mein Suryast

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                                         कन्याकुमारी में सूर्यास्त                                                                           -हरिशंकर राढ़ी दोपहर बाद हमने बाकी बची जगहों को देखने का कार्यक्रम बनाया। कन्याकुमारी स्थल जिस देवी के नाम पर जाना जाता है, उस अधिष्ठात्री  देवी कन्याकुमारी का एक विशाल  मंदिर यहाँ बना हुआ है। स्थल का नाम कन्याकुमारी पड़ने के पीछे एक पौराणिक कथा बताई जाती है। कहा जाता है कि कन्याकुमारी पार्वती का ही एक दूसरा रूप है। किसी जन्म में देवी पार्वती ने एक कन्या के रूप में भगवान शिव को पति के रूप में पाने हेतु घोर तपस्या की थी। उस समय बाणासुर का आतंक चहुँओर फैला हुआ था और वह देवताओं के लिए संकट बना हुआ था। ब्रह्मा से प्राप्त वरदान के कारण वह अजेय था और उसका...

Vivekanand Rock Memorial

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                                      विवेकानन्द रॉक मेमोरिअल                                                                  -हरिशंकर राढ़ी       कन्याकुमारी के मुख्य  भूखण्ड से लगभग पाँच सौ मीटर की दूरी पर सागर में स्थित विवेकानन्द स्मारक यहाँ का एक महत्त्वपूर्ण आकर्षण  है। इस स्मारक पर गए बिना कन्याकुमारी की यात्रा व्यर्थ ही मानी जाएगी। यहाँ पहुँचने के लिए तमिलनाडु राज्य के अधीनस्थ पूम्पूहार शिपिंग  कारपोरेशन फेरी सर्विस (नाव सेवा) चलाता है। सेवा प्रातः शुरू होती  है और इसका अन्तिम चक्कर सायं चार बजे लगता है। इसके बाद चट्टान पर जाने हेतु सेवा बंद हो जाती है, उधर से आने के लिए उपलब्ध रहती है।         विवकानन्द रॉक मेमोरिअल दरअसल लगभग उस विन्दु के पास स्थित है जहा...

Kanyakumari Mein

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                                        कन्या कुमारी में सूर्योदय                                                                                                                                                                       -हरिशंकर राढ़ी                     होटल की बॉलकनी में बैठा रात देर तक शहर  का दृश्य  देखने का आनन्द लेता रहा था। बॉलकनी के ठीक सामने लोकल बस स्टैण्ड था और मैं यह देखकर आश्चर्यमिश्...

Kanyakumari Ke Liye

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                                               कन्या कुमारी की ओर                                                                                                                                                                    -हरिशंकर  राढ़ी        योजनानुसार हमलोग प्रातः छः बजे तक रामेश्वरम बस स्टेशन  पहुँच चुके थे। वहाँ मालूम किया तो कन्याकुमारी के लिए सात बजे बस नियत  थी और वहीं खड़ी थी। बुकिंग खिडकी पर एक स...

रामेश्वरम में

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हरिशंकर राढ़ी दोपहर बाद का समय हमने घूमने के लिए सुरक्षित रखा था और समयानुसार ऑटोरिक्शा  से भ्रमण शुरू  भी कर दिया। पिछले वृत्तांत में गंधमादन तक का वर्णन मैंने कर भी दिया था। गंधमादन के बाद रामेश्वरम द्वीप पर जो कुछ खास दर्शनीय  है उसमें लक्ष्मण तीर्थ और सीताकुंड प्रमुख हैं। सौन्दर्य या भव्यता की दृष्टि  से इसमें कुछ खास नहीं है। इनका पौराणिक महत्त्व अवश्य  है । कहा जाता है कि रावण का वध करने के पश्चात्  जब श्रीराम अयोध्या वापस लौट रहे थे तो उन्होंने सीता जी को रामेश्वर  ज्योतिर्लिंग के दर्शन  के लिए, सेतु को दिखाने के लिए और अपने आराध्य भगवान शिव  के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए पुष्पक  विमान को इस द्वीप पर उतारा था और भगवान शिव की पूजा की थी। यहाँ पर श्रीराम,सीताजी और लक्ष्मणजी ने पूजा के लिए विशेष  कुंड बनाए और उसके जल से अभिषेक  किया । इन्हीं कुंडों का नाम रामतीर्थ, सीताकुंड और लक्ष्मण तीर्थ है । हाँ,  यहाँ सफाई  और व्यवस्था नहीं मिलती और यह देखकर दुख अवश्य  होता है। स्थानीय दर्शनों  में हनुमा...

Beyond popular outrage

मैं मानता हूं कि टीम अन्ना ने भ्रष्टाचार रोकने के लिए एक सार्थक शुरुआत की है. मैं अन्ना के मुद्दे और आंदोलन दोनों के पक्ष में रहा हूं और आगे भी रहूंगा. मेरे कुछ मित्र इस विषय पर ज़रा हटकर सोचते हैं. एक आदर्श लोकतंत्र की यह शर्त है कि वहां जितना महत्व समर्थन के लिए है, विरोध के प्रति उतना ही सम्मान होना चाहिए. हमारे विरुद्ध सोचने वालों के भी अपने तर्क हैं और अपनी चिंताएं हैं. वरिष्ठ पत्रकार विशाल दुग्गल इस मुद्दे और आंदोलन के विरुद्ध तो नहीं हैं, लेकिन अलग ढंग से सोचते हैं. अब जब इस पर हल्ले का माहौल बीत चुका है, मेरा मानना है कि अगर हम वाक़ई भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हैं तो इन मुद्दों पर भी सोचा जाना चाहिए. श्री दुग्गल का पूरा लेख आपके विचार के लिए: इष्ट देव सांकृत्यायन Corruption today has seeped into the vitals of India’s body politic, acquiring frighteningly menacing proportions to the extent that any fresh disclosure of a scam has ceased to shock the people any more. What has accentuated the citizens’ growing disenchantment with the system is the connivance o...

Samarthan ka Sailaab

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समर्थन का सैलाब                     -हरिशंकर राढ़ी अनुमान था कि होगा ऐसा ही।  देशवासियों को एक इंजन मिल गया है और वे अब किसी भी ब्रेक से रुकने वाले नहीं। आज तो जैसे दिल्ली के सारे रास्ते रामलीला मैदान की ओर जाने के लिए ही हों , जैसे दिल्ली मेट्रो केवल अन्ना समर्थकों के लिए ही चल रही हो और हर व्यक्ति के पास जैसे एक ही काम हो- रामलीला मैदान पहुँचना और अन्ना के बहाने अपनी खुद की लड़ाई को लड़ना । साकेत मेट्रो स्टेशन  पर जो ट्रेन बिलकुल खाली आई थी वह एम्स जाते-जाते भर गई और सिर्फ भ्रष्टाचार  विरोधी बैनरों और नारों से। नई दिल्ली स्टेशन से बाहर निकलता हुआ हुजूम आज परसों की तुलना में कई गुना बड़ा था। सामान्य प्रवेश द्वार पर ही हजारों  की भीड़ केवल प्रवेश की प्रतीक्षा में पंक्तिबद्ध थी। किसी भी चेहरे पर कोई शिकन  नहीं, कोई शिकायत  नहीं। ऐसा शांतिपूर्ण प्रदर्शन  मैंने तो अब तक नहीं देखा था। सच तो यह है कि प्रदर्शनों  से अपना कुछ विशेष  लेना -देना नहीं। राजनैतिक पार्टियों का प्रदर्शन...

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