रुदन

रुदन
एक कला है
और
आंसू एक कलाक्रिति .
कुछ लोग
इस कला के मर्मज्ञ होते हैं
उन्हें
शास्त्रीय रुदन से लेकर
पॅ।प रुदन का
विचित्र अभ्यास होता है .
यदा –कदा
कुछ अंतर्मुखी भी होते हैं
जो
नज़रें बचाकर रोते हैं
इस कला को
आत्मा की भागीरथी से धोते हैं.
किंतु,
’वास्तविक’ कलाकार
गुमनाम नहीं होना चाहते
उन्हें ज्ञान है-
कला का मूल्य होता है,
अतः
अपनी डबडबाई
ढलकती, छ्लकती आंखों के
खारे जल को
‘सहानुभूति‘ की कीमत पर
बेच देते हैं,
फिर
नया स्टॅ।क लाते हैं
और मैं
कलाहीन
उन्हें देखता रहता हूं
बस
आंखों में कुछ लिए हुए.

Comments

  1. बहुत बढिया, मगरमच्छी रुदन तो हमने कई नेताओं को करते देखा है.

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  2. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  3. क्या खूब लिखा है भाई

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  4. सच रुदन एक कला है वरना धारावाहिकों में रोते अभिनेता रोते कैसे ? रोने -रोने में फर्क है !
    "एक
    असफल अभिनेत्री का रोना
    उसका
    अंग प्रदर्शन रोना-रोना !!"

    बधाई
    [] राकेश 'सोहम'

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  5. आप ही क्यों, पूरे देश की जनता देखती रहती है सर!

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  6. यह सच है कि सारे देश की जनता रोती है किंतु कह तो नहीं पाती !कुछ सबकी, कुछ अपनी कहने का काम तो कवि का ही है प्रभो !

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