क्योंकि थोड़ा सा मैं भी जीना चाहती हूं

(माइक्रो-स्टोरी)
“तू है कौन?”
“जिंदगी”
“तो यहां क्या कर रही है।?“
“तुम्हारे साथ हूं?”
“क्यों?”
“क्योंकि थोड़ा सा मैं भी जीना चाहती हूं।”

Comments

  1. अच्छा लगा…।
    कम शब्दों में बहुत कुछ कह दिया…।

    ReplyDelete
  2. "मुझे मार कर ?"
    "नहीं"
    "तो"
    "मरने न दूँगी तुम्हे मौत के बाद भी "
    "वो कैसे "
    "जिन्दा रहेगा तू मेरे संग "

    ReplyDelete
  3. यह जिन्दगी के साथ वाला कौन है?

    ReplyDelete
  4. बड़ा रहस्यवादी मामला लगता है भाई। कौन क्या कह रहा है?

    ReplyDelete
  5. वाह...वाह।
    क्या बात है..
    लोटे में समन्दर समाया है।

    ReplyDelete
  6. muthee se aaapne dunia nikaal dee. behtareen...

    ReplyDelete
  7. एक बहुत ही ख़ूबसूरत लघु कथा है . मुझे याद आ रही है एक प्रसिद्ध साहित्यकार की एक लघु कथा -
    - 'पापा मम्मी की पींठ बहुत गोरी है .'
    - 'ऐसा कौन कहता है बेटा ?', पिता का माथा ठनका .
    - 'आप ही तो कहते हैं . '

    ReplyDelete

Post a comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

Azamgarh : History, Culture and People

...ये भी कोई तरीका है!

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

रामेश्वरम में

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

चित्रकूट की ओर

चित्रकूट में शेष दिन