क्लाइव या मैकाले - किसे पहले जूते मारेंगे आप?

डिसक्लेमर: इस चर्चा में अगर कोई विचार मेरा है, तो उसका अलग से जिक्र किया जाएगा। - दिलीप मंडल

इन दो तस्वीरों को देखिएइनमें ऊपर वाले हैं लार्ड क्वाइव और नीचे हैं लॉर्ड मैकाले। लॉर्ड वो ब्रिटेन में होंगे हम उन्हें आगे क्लाइव और मैकाले कहेंगेएक सवाल पूछिए अपने आप सेकभी आपको अगरह कहा जाए कि इनमें से किसी एक तस्वीर को जूते मारो, या पत्थर मारो या गोली मारो या नफरत भरी नजरों से देखोतो आपकी पहली च्वाइस क्या होगी

अनुरोध इतना है कि इस सवाल को देखकर किसी नए संदर्भ की तलाश में नेट पर या किताबों के बीच चले जाइएगाअपनी स्मृति पर भरोसा करें, जो स्कूलों से लेकर कॉलेज और अखबारों से लेकर पत्रिकाओं में पढ़ा है उसे याद करेंऔर जवाब देंये सवाल आपको एक ऐसी यात्रा की ओर ले जाएगा, जिसकी चर्चा कम हुई हैजो इन विषयों के शोधार्थी, जानने वाले हैं, उनके लिए मुमकिन है कि ये चर्चा निरर्थक होलेकिन इस विषय पर मैं अभी जगा हूं, इसलिए मेरा सबेरा तो अभी ही हुआ हैइस पर चर्चा आगे जारी रहेगी

Comments

  1. दिलीप भाई, सवाल को संशोधित भी करें...
    पहले किसे जूते मारेंगे कि बजाय "पहले किसे, कितने, जूते मारेंगे और सिर्फ़ जूते ही क्यों मारेंगे" यह ठीक रहेगा... :) :)

    ReplyDelete
  2. दिलीप भाई! इन्हे जूता मारने से क्या हासिल होगा?
    वे इस कदर गलत भी नही थे क्योकि वे जो कर रहे थे अपने राष्ट्र हित मे कर रहे थे !
    यदि जूता मारने का मन ही बना लिया है तो क्रिपया उन्हे मारिये जो अपने ही देश को आज लूट रहे है वे नेता जातवादी अलगाववादी भ्रष्टाचारी,उन्हे जूता मारने के लिये बस थोडा सा चलना होगा !कम से कम ब्रितानिया तक तो नही जाना होगा!और उतने ही जूते उन्हे भी मारिये जो आज अंग्रेज़ियत सभ्यता के दुम्छल्ले बने फ़िरते है!

    ReplyDelete
  3. भाई उम्दा सोच जी ने बड़ी अच्छी बात कही है दिलीप जी. हमें एक बार उनके सुझाव पर गौर करना चाहिए.

    ReplyDelete
  4. दोनों अपना अपना काम कर रहे थे । यदि कोई अपराधी था तो वे हम थे जो अपने देश को गुलामी से ना बचा सके ।
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  5. भाई ईष्टदेव जी, उम्दा सोच की बात का ध्यान रखा जाएगा। उनकी बात में सारतत्व है। दरअसल मैं भारतीय इतिहास को लेकर एक वैकल्पिक सोच (गलत या सही)की ओर सभी मित्रों का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं। हाशिए का इतिहास तो लिखा नहीं जाता। हाशिया हमेशा गुरिल्ला तरीके से इतिहास में घुस जाता है।

    ReplyDelete
  6. जूते तो इनके मानस पुत्रो को पडने चाहिये

    ReplyDelete

Post a Comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

...ये भी कोई तरीका है!

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

रामेश्वरम में

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

...ये भी कोई तरीका है!

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...