प्रेम नाम होता बंधु!

सागर तोमर

नहीं सभी की क़िस्मत में 
है प्रेम लिखा होता बंधु 

हर एक आदमी तो अपना 
यूँ चैन नहीं खोता बंधु। 

जो चले दर्प को आग लगा 
पार वही पा जाता है 
प्रेम-द्वार सबके हेतु 
नहीं खुला होता बंधु। 

रहे एक आसक्ति इसमें 
कहीं विरक्ति भी लेकिन 
यही तो इसकी रंगत है 
जो 'प्रेम' नाम होता बंधु

कभी तो मिलना, कहीं बिछड़ना 
इसके धंधे हैं अजीब 
इसी मिलन-बिछड़न में जीवन 
शहर-गाम होता बंधु। 

प्रेम-लगन का हासिल क्या ? 
कुछ रातों के जगराते 
लेकिन इक उपलब्धि जैसे 
चार धाम होता बंधु। 

हर कण इसका है अनमोल 
कोई ख़रीद नहीं सकता 
फिर भी दुनिया के बाज़ार 
एक दाम होता बंधु। 

इसे चाहिए पूर समर्पण 
हर पल इसको दे दो बस 
इसका एक तगादा अपना 
आठ याम होता बंधु। 

सब गतियों की एक गति 
सब रस्तों का एक धाम 
एक संचरण इसका हर पल 
दखन-वाम होता बंधु। 

हो कोई 'सागर' या 'कमल
डुबना-खिलना सब इसमें ही 
तरना-मुरझाना एक तमाशा 
सुबह-शाम होता बंधु

 


Comments

Popular posts from this blog

...ये भी कोई तरीका है!

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

रामेश्वरम में

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

चित्रकूट की ओर

...ये भी कोई तरीका है!