झरने की हर झरती झलकी!

गोपाल बघेल मधु

झरने की हर झरती झलकी,
पुलकी ललकी चहकी किलकी;
थिरकी महकी कबहुक छलकी,
क्षणिका की कूक सुनी कुहकी! 

कब रुक पायी कब देख सकी,
रुख़ दुख सुख अपना भाँप सकी;
बहती आई दरिया धायी,
बन दृश्य विवश धरिणी भायी! 

कब पात्र बनी किसकी करनी,
झकझोर बहाया कौन किया;
कारण था कौन क्रिया किसकी,
सरका चुपके मग कौन दिया! 

प्रतिपादन आयोजन किसका
क्या सूत्रधार स्वर सूक्ष्म दिया;
हर घट बैठा घूँघट झाँका
चौखट टक टक देखा बाँका! 

चैतन्य चकोरी किलकारी
कैवल्य ललित लय सुर धारी;
क्या बैठा था हर मधुपलकी,
क्या वही नचाया दे ठुमकी! 


Comments

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

इति सिद्धम

पेड न्यूज क्या है?

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

रामेश्वरम में

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

...ये भी कोई तरीका है!

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

इति सिद्धम

आइए, हम हिंदीजन तमिल सीखें

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

पेड न्यूज क्या है?