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 (हरिशंकर राढ़ी के ललित निबंध संग्रह 'कुल्हड़ की चाय' की ख्यातिप्राप्त लेखिका,  रेडियो-टीवी उद्घोषिका अर्चना मिश्र द्वारा की गई समीक्षा :  ‘ साहित्य नंदिनी ’,   नवम्बर , 2025 ) ' कुल्हड़ की चाय ' का सोंधापन   - अर्चना मिश्रा लब्धप्रतिष्ठ लेखक , कवि , व्यंग्यकार , निबंधकार एवं भाषाविद श्री हरिशंकर राढ़ी का निबंध-संग्रह ' कुल्हड़ की चाय ' पढ़ने का या  यों कहें की पीने का अवसर प्राप्त हुआ और मैं यह कहे बिना नहीं रह पाऊँगी कि इनके सोंधेपन से मन तृप्त हो गया। इन निबंधों का सरस , रोचक एवं ज्ञानवर्धक होना बड़ा सुखद लगा। इस संग्रह की सबसे मुख्य विशेषता इसका विस्तृत फलक एवं बहुआयामी होना है। संस्कृत साहित्य एवं उनके कवियों की चर्चा , खेत-खलिहान , गूलर , कनेर , चैत , रुपैया , पेंसिल , संगीत और शबरी जैसे विषयों को समेटता यह संग्रह पाठकों को ज्ञान एवं भाव के समंदर पर लहराने के लिए छोड़ देता है। राढ़ी जी द्वारा किए गए विषयों के चयन एवं विषय अनुकूल भाषा के सुन्दर संयोजन ने गद्य को भी काव्य जैसा रसपूर्ण बना दिया है। इन्हें पढ़ते हुए लेखक कभी अतीत की अंतर्यात्रा पर निकल ज...

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