नागरी लिपि पर गंभीर विमर्श

डॉ. हरि सिंह पाल  

अब अन्य मंच एवं संस्थान नागरी लिपि नागरी लिपि पर सोत्साह विमर्श करने लगे हैं। यह नागरी लिपि के प्रचार-प्रसार एवं संरक्षण व संवर्धन की दिशा में शुभ लक्षण है। शिक्षा मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग ने अपने हीरक जयंती समारोह में 2अक्तूबर को एक पूरा सत्र नागरी लिपि विमर्श पर ही रखा। इस सत्र में उत्तराखंड की पूर्व निदेशक (उच्च शिक्षा) डॉ नवीन चंद्र लोहानी, पत्रकार मुकेश नौटियाल और इन पंक्तियों के लेखक ने विमर्श प्रस्तुत किया।

इसी प्रकार 4 अक्तूबर को मारीशस स्थित विश्व हिंदी सचिवालय
, भारत सरकार के आगरा स्थित केंद्रीय हिंदी संस्थान और वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में नागरी लिपि के समक्ष चुनौतियां विषयक संगोष्ठी आयोजित की गई जिसमें डॉ शैलेन्द्र कुमार शर्मा, श्री प्रभु जोशी, श्री राहुल देव, अनिल जोशी और इन पंक्तियों के लेखक ने भाग लिया। केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष श्री जोशी ने विशेष रूप से नागरी लिपि परिषद के महत्व को रेखांकित किया।

  • नागरी लिपि विषयक कई संगोष्ठियों का आयोजन 

राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना और नागरी लिपि परिषद मध्य प्रदेश शाखा ने 4 अक्तूबर को ही नागरी लिपि के वैश्विक परिदृश्य पर अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि आभासी संगोष्ठी परिषद के कार्याध्यक्ष डॉ शहाबुद्दीन शेख़ की अध्यक्षता में आयोजित की। इसमें नार्वे से सुरेश चंद्र शुक्ल, पोलैंड से डॉ सुधांशु कुमार शुक्ल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य डॉ किरन हजारिका, अरुणाचल प्रदेश की डॉ जोरम आनिया ताना, डॉ शैलेन्द्र शर्मा, डॉ हरेराम वाजपेई और इन पंक्तियों के लेखक ने भाग लिया। कुछ तकनीकी कारणों से इसमें कुछ विद्वानों को बोलने के लिए वांछित समय नहीं मिल पाया,इसका परिषद को खेद है। एक ही दिन में, एक ही समय पर नागरी लिपि पर केंद्रित दो संगोष्ठियों का आयोजन किया जाना, नागरी लिपि की प्रासंगिकता का द्योतक है। यह आप सभी नागरी प्रेमियों की उदारता का ही सुफल है।

[लेखक नागरी लिपि परिषद के महामंत्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार हैं]

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