वार्षिक अधिवेशन एवं ई-विश्व कवि सम्मेलन


अखिल विश्व हिंदी समिति, टोरोंटो का 11वाँ वार्षिक अधिवेशन व ई- विश्व कवि सम्मलेन’ 25 जुलाई 2020 शनिवार को प्रातः 10 से सायं 2 बजे (भारतीय समय 7:30 सायं से 11:30 रात्रि) तक कोरोना काल में ज़ूम कांफ्रेंस द्वारा पूर्ण भव्यता, सफलता, साहित्यिक तरंग व आध्यात्मिक संवेदन के साथ संपन्न हुआ। समारोह की मुख्य अतिथि थीं टोरोंटो, कनाडा की भारतीय कोंसलाधीश सम्माननीया अपूर्वा श्रीवास्तव जी। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि थे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निदेशक श्री वेद प्रकाश गौड़ जी। कार्यक्रम की अध्यक्षता की हिंदी एवं संस्कृति शोध संस्थान के महासचिव व अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, भारत के राष्ट्र सचिव आगरा से डॉ. श्री भगवान शर्मा जी ने। कनाडा से हिंदी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष व हिंदी चेतनाके प्रमुख संपादक श्री श्याम त्रिपाठी जी कार्यक्रम के उपाध्यक्ष रहे। 

विशिष्ट अतिथि थे नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली, के महासचिव डॉ हरिसिंह पाल जी। अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, भारत के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव डॉ प्रवीण गुप्ता व उपाध्यक्ष श्री राजेश गर्ग विशेष अतिथि थे। अखिल विश्व हिंदी समिति, न्यूयॉर्क, सं रा अमरीका के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ प्रदीप टंडन विशिष्ट अतिथि थे। इस सम्मेलन का आयोजन व संचालन अखिल विश्व हिंदी समिति, आध्यात्मिक प्रबंध पीठ व  मधु प्रकाशन, टोरोंटो के अध्यक्ष व हिंदी साहित्य सभा के महासचिव गोपाल बघेल मधुने किया। प्रमुख सहायक संचालक थे फ़्रीडम योगा व संस्कृत योग सभा, कनाडा के अध्यक्ष आचार्य संदीप त्यागी जी। 

पहले सभी उपस्थित साहित्यिकार व श्रोता परस्पर परिचय किए। ज़ूम पर एक साथ 50 व्यक्ति उपस्थित हुए व कुल मिला कर 75 लोग कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उपस्थित साहित्यकारों में भारत, कनाडा, अमरीका, लन्दन, मॉरीशस, इत्यादि देशों से सहभागिता हुई। कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री गोपाल बघेल मधुद्वारा उच्चरित ऋग्वेद की दो ऋचाओं, ‘संग्छध्वं सम्बदध्वंॐ मधु वाता ऋतायतेके शब्द मंत्रों से हुआ ।

सम्मेलन को सर्वप्रथम मुख्य अतिथि सम्माननीया भारतीय कोंसलाधीश अपूर्वा श्रीवास्तव जी ने सम्बोधित किया। उन्होंने पूर्व भारतीय विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज जी के साथ अपने व्यक्तिगत सचिव के कार्यकाल के विषय की स्मृति साँझा कीं व साहित्य के प्रसार प्रचार के लिए अपनी विशेष प्रतिवद्धता प्रकट की। उन्होंने सभी साहित्यकारों के अनवरत प्रयासों को सराहा व हार्दिक धन्यवाद दिया व भारतीय कोंसलावास की और से हिंदी के विकास व उन्नयन के लिये हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया। 

आयोजक गोपाल बघेल मधुने उनकी, कोंसल देवेन्द्र पाल सिंह जी व समस्त भारतीय कोंसलावास के अधिकारियों के सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। अनेक वर्षों से टोरोंटो कोंसलावास प्रतिवर्ष हिंदी दिवसआदि पर कार्यक्रम आयोजित करता है जिसका संचालन करने का सौभाग्य गोपाल बघेल मधुव अन्य साहित्यिकारों को मिलता रहा है। इसके बाद मुख्य अतिथि गण आदरणीय श्री वेद प्रकाश गौड़, डॉ श्रीभगवान शर्मा, श्री राजेश जैन, डॉ प्रवीण गुप्ता, डॉ हरिसिंह पाल, श्री श्याम त्रिपाठी व डॉ प्रदीप टंडन एक-एक कर सम्मेलन को संबोधित किए! तत्पश्चात् प्रमुख बीज वक्ताओं प्रोफ़ेसर व डॉ अमर सिंह -छिंदवाड़ा, डॉ अरविंद नवले- नाँदेड़, डॉ. जगन्नाथ प्रसाद बघेल- मुम्बई, श्री पंकज वशिष्ठ प्रियम- अध्यक्ष-साहित्योदय- बाबा धाम, इत्यादि ने सम्मेलन को सम्बोधित किया व अपनी रचनाएँ भी सुनाईं। 

कार्यक्रम में इसके उपरांत 33 से अधिक उपस्थित कवियों ने अपनी मार्मिक व मंत्रमुग्ध करने वाली रचनाएँ सुनाकर श्रोताओं का हृदय तरंगित किया। काव्य पाठ करने वाले कनाडा के प्रमुख कवि गण थे सर्वश्री श्याम त्रिपाठी, विजय सूरी, धर्म जैन, भगवत शरण श्रीवास्तव, गोपाल बघेल मधु’, आचार्य संदीप त्यागी, राज माहेश्वरी जी, इत्यादि। कनाडा की कवयत्रियों में प्रमुख थीं  सर्व श्रीमती मीना चोपड़ा, श्यामा सिंह, सविता अग्रवाल व ऋचा बघेल व डॉ साधना जोशी जी, इत्यादि। 

भारत से काव्य पाठ करने वाले प्रमुख कवि गण थे सर्वश्री डॉ श्रीभगवान शर्मा-आगरा, डॉ अमर सिंह बघेल- छिंदवाड़ा, डॉ अरविंद नवले- नाँदेड़, डॉ जगन्नाथ प्रसाद बघेल- मुम्बई, पंकज वशिष्ठ प्रियम- बाबा धाम झारखण्ड, सुनील गुप्ता श्वेत- मोहाली (अयोध्या), डॉ सुनील जाधव- नाँदेड़, राजपाल पाल- मथुरा, आदि। 

भारत से काव्य पाठ करने वाली प्रमुख कवयत्रियाँ थीं कुमारी वैशाली पाल- शिवपुरी म.प्र., सर्व श्रीमती सुदेष्णा सामंत- हैदराबाद, डॉ कुमुद बाला मुखर्जी- हैदराबाद, डॉ संगीता पाल- कच्छ, डॉ रजनी शर्मा चंदा, डॉ सुशीला पाल, मधु चन्दा- जोधपुर, रेणु बाला- राँची, रेखा पाण्डेय- भुज, निवेदिता चक्रवर्ती- गुरुग्राम, डॉ हीरा मीणा- दिल्ली (जयपुर), इत्यादि। 

ज़ूम अधिवेशन में पधारे अन्य प्रमुख साहित्यकार थे डॉ राजेन्द्र मिलन- आगरा, कनाडा के सुप्रसिद्ध वयोवृद्ध कवि डॉ कैलाश भटनागर व श्रीमती सरोज भटनागर, डॉ रवि पाल - नई दिल्ली, वरिष्ट कवि राजेश जैन राही- छत्तीसगढ़, डॉ.अरविंद पाल भोगन- मैनपुरी, संजय करुणेश -गिरिडीह, विनय अंतवाल- देहरादून, कवि वर श्री अजय गुप्ता- कनाडा, कवयत्री सरोजिनी जौहर- कनाडा, आदि। उनके या हमारे समयाभाव वश या तकनीकी कारणों के कारण इस वार हम उपय़ुक्त समय पा उनकी रचनाएँ नहीं सुन पाए। डॉ साकेत सहाय, श्री राणा हरपिंदर पाल सिंह, सैंधम आस्था पाल जी, श्री रवि शंकर विद्यार्थी, कुँ. अरण्य बघेल स्वारेज- कनाडा, आदि भी उपस्थित रहे।

साहित्यिकारों व वक्ताओं ने अध्यात्म व अन्य विषयों पर अपनी ओजस्वी, सार गर्भित, चेतना संस्फुरित, मधुर कण्ठों से गायी रचनाएँ व आत्म संप्रेषण से तरंगित प्रस्तुतियाँ व वक्तव्य दे सबको आनन्दित किया व मन मोह लिया। इस वार विगत दश वर्षों से सदैव सम्मिलित होने वाले हमारे परम-आदरणीय, अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी समिति, भारत के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सुप्रसिद्ध डॉ. दाऊजी गुप्ता जी, हिंदी साहित्य सभा कनाडा के अध्यक्ष श्री अनिल पुरोहित, विश्व हिंदी संस्थान कनाडा के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर सरन घई जी, इत्यादि उत्कट इच्छा होते हुए भी व्यक्तिगत व तकनीकी कारणों वश कार्यक्रम से जुड़ नहीं पाए; पर आत्मीय भाव से वे व अन्य बहुत से साहित्यकार हम लोगों के साथ रहे! 

भारतीय कौंसलावास टोरोंटो के वरिष्ठ कोंसल श्री देविंदर पाल सिंह जी का इस आयोजन में विशेष आशीर्वाद रहा। आयोजन में परोक्ष अपरोक्ष से विशेष योगदान देने वालों में श्री चन्द्र कुमार सिंह, आ. संदीप त्यागी, डॉ प्रवीण गुप्ता, श्री अजय गुप्ता, श्री भगवत शरण श्रीवास्तव, डॉ कैलाश भटनागर, श्री सरन घई, श्री सेवक सिंह, इत्यादि प्रमुख रहे। 

श्री चन्द्र कुमार सिंह, आचार्य संदीप त्यागी, डॉ हरिसिंह पाल व श्री वेद प्रकाश गौड़, संचालक, इत्यादि कार्यक्रम के समापन तक सुस्मित वातावरण बनाए रखने व समीक्षा करने में तत्पर रहे।

मुख्य अतिथियों ने साहित्यकारों को हिंदी साहित्य की सेवा करने के लिये सराहा, प्रोत्साहित किया और सहयोग प्रदान करने के लिए आश्वस्त किया। पूर्ण मनोयोग से आ. श्री वेद प्रकाश गौड़ जी की उपस्थिति पूरे समय रही और उनके विचार व वक्तव्य विशेष रूप से प्रेरणास्पद रहे। उन्होंने भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राजभाषा विभाग से हिंदी साहित्य के संवर्धन व प्रचार प्रसार के लिए हर सम्भव सहयोग देने का आशीर्वचन दिया। 

डॉ. श्रीभगवान शर्मा जी का संवोधन हर वर्ष की तरह हृदयों को आल्ह्वादित व आनन्दित करने वाला था। उन्होंने व अन्य प्रमुख अतिथियों ने आयोजन की गरिमापूर्ण प्रस्तुति के लिए आयोजक व संचालक श्री गोपाल बघेल मधुको धन्यवाद दिया व उनकी आध्यात्मिक व हिंदी साहित्य की सेवाओं की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। इस बार कोरोना के कारण उपस्थित परिस्थितियों में हमारा वार्षिक अधिवेशन ज़ूम पर आयोजित किया गया। पिछले 10 वर्षों की भाँति हम इस वर्ष अभी तक विश्व कवि सम्मेलनआयोजित नहीं करा पाए। फिर भी कार्यक्रम में भारत, कनाडा व विश्व भर से भरपूर सहभागिता रही। कई रूप से यह कार्यक्रम भौतिक अधिवेशन से भी अधिक अच्छा रहा और यह अद्भुत आध्यात्मिक तरंग छोड़ने में सफल रहा। 

कार्यक्रम में अन्तर्राष्ट्रीय हिंदी समिति - भारत, अखिल विश्व हिंदी समिति, सं रा अमरीका, कनाडा की हिंदी साहित्य सभा, आध्यात्मिक प्रबंध पीठ, फ़्रीडम योगा, हिंदी प्रचारिणी सभा, विश्व हिंदी संस्थान, इत्यादि संस्थाओं का भरपूर सहयोग मिला। कई व्हाट्सऐप समूहों जैसे साहित्योदय, अमर लेख, अखिल विश्व हिंदी समिति, आदि का पूरा सहयोग व सहभागिता मिली। 

सभी कवि व श्रोता गणों एवं अतिथियों के तन- मन- धन व हृदय से किये परोक्ष-अपरोक्ष सहयोग के लिये संस्था की ओर से हार्दिक आभार व साधुवाद दिया गया। अन्त में साहित्य की सेवा के लिये सभी कवियों, कवयित्रियों, श्रोताओं व सहयोगियों को आयोजकों की ओर से साधुवाद दिया गया। सभी सहभागिता करने वाले साहित्यिकारों व साहित्य अनुरागियों को यथाशीघ्र ई-प्रमाण पत्र भेजा जाएगा। 

सम्मेलन का चलचित्र नीचे दिया है जो 7 दिन रहेगा। आप इसे तुरंत संग्रहित कर लें। चल- चित्र देख कर इस ई-विश्व कवि सम्मेलनका पूरा आनन्द आप ले सकते हैं।

[आयोजक एवं अखिल विश्व हिंदी समिति टोरंटो के अध्यक्ष गोपाल बघेल मधु से प्राप्त विज्ञप्ति के अनुसार]


Comments

  1. 🙏💐🙏💐 हार्दिक नमन व साधुवाद!

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुन्दर आयोजन.. हृदय तल से आभार व साधुवाद 🙏

    ReplyDelete
  3. निस्संदेह अत्यंत सफल कार्यक्रम | ढेर सारी सुभकामनाओं के साथ - श्याम त्रिपाठी

    ReplyDelete
  4. बहुत ही सुन्दर व अविस्मरणीय कार्यक्रम सम्पन्न करने के लिये बहुत बहुत बधाई व हार्दिक शुभकामनायें !!
    - गाफिल स्वामी ( अलीगढ़ )
    मोबा. 9758494465

    ReplyDelete

Post a comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Most Read Posts

Bhairo Baba :Azamgarh ke

Maihar Yatra

Azamgarh : History, Culture and People

सीन बाई सीन देखिये फिल्म राब्स ..बिना पर्दे का

रामेश्वरम में

ये क्या क्रिकेट-क्रिकेट लगा रखा है?

गन्ने के खेत में रजाई लेकर जाती पारो

गढ़ तो चित्तौडग़ढ़...

चित्रकूट की ओर

चित्रकूट में शेष दिन