ghazel

ग़जल
फिसलती रही
 &हरिशंकर राढ़ी

टूटकर साँस चलती रही।
सोच करवट बदलती रही।
बाजुओं में सदा जीत थी
उँगलियों से फिसलती रही।
चाँदनी में अकेली दुल्हन
भोर तकती] पिघलती रही।
दो कदम बस चले साथ तुम
उम्र भर याद चलती रही।
काग की चोंच में मोतियां
हंसिनी हाथ मलती रही।
सेंकने की तलब थी उन्हें
झोंपड़ी मेरी जलती रही।
यूँ कटा जिन्दगी का सफर
रोज गिरती-संभलती रही।

Comments

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " जनहित मे प्रेमपत्र का पुनर्चक्रण - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. ज़िन्दगी को बड़ी खूबसूरती से लिखा है, बेहतरीन बहुत प्यारी
    Hindi Shayari

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  3. https://bnc.lt/m/GsSRgjmMkt

    निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
    बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।

    बात मात्र लिख भर लेने की नहीं है, बात है हिन्दी की आवाज़ सुनाई पड़ने की ।
    आ गया है #भारतमेंनिर्मित #मूषक – इन्टरनेट पर हिंदी का अपना मंच ।
    कसौटी आपके हिंदी प्रेम की ।
    जुड़ें और सशक्त करें अपनी हिंदी और अपने भारत को ।

    #मूषक – भारत का अपना सोशल नेटवर्क

    जय हिन्द ।

    https://www.mooshak.in/login

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