खुद को खोना ही पड़ेगा

लंबे समय से ब्लाग पर न आ पाने के लिए माफी चाहता हूं। दरअसल, हमारे चाहने भर से कुछ नहीं होता। इसके पहले जब मैंने अपनी गजल पोस्ट की थी, उस पर आपने बहुत सी उत्साहजनक टिप्पणियां देकर मुझे अच्छा लिखने को प्रेरित किया था। आज जो गजल पेश कर रहा हूं, यह किस मनोदशा में लिखी गई, यह नहीं जानता। हां, यहां निराशा हमें आशा की ओर ले जाते हुए नहीं दिखती...?-

अब तो हमको दूर तक कोई खुशी दिखती नहीं
जिंदा रहकर भी कहीं भी जिंदगी दिखती नहीं

हर किसी चेहरे पे हमको दूसरा चेहरा दिखा
एक भी चेहरे के पीछे रोशनी दिखती नहीं

जिनको आंखों का दिखा ही सच लगे, मासूम हैं
बेबसी झकझोर देती है, कभी दिखती नहीं

खुद को खोना ही पड़ेगा प्यार पाने के लिए
देखिए, मिलकर समंदर से नदी दिखती नहीं

खुद को खोना ही पड़ेगा प्यार देने के लिए
आंख ही सबकुछ दिखाती है, अजी दिखती नहीं।

Comments

  1. कभी कभी मुझे भी घोर निराशा होती है लेकिन फिर छंट जाती है.

    ReplyDelete
  2. देखिए, मिलकर समंदर से नदी दिखती नहीं
    sundr laine.

    ReplyDelete
  3. सच्चे मोतियों से सजी इस रचना के लिए बधाई!

    ReplyDelete
  4. खुद को खोना ही पड़ेगा प्यार पाने के लिए
    देखिए, मिलकर समंदर से नदी दिखती नहीं
    ये पंक्तियाँ बहुत पसंद आयीं

    ReplyDelete
  5. खुद को खोना ही पड़ेगा प्यार पाने के लिए
    देखिए, मिलकर समंदर से नदी दिखती नहीं

    -क्या बात है..

    ReplyDelete
  6. जो सबने सराहा वही बात मैं रखता हूँ कि -देखिए, मिलकर समंदर से नदी दिखती नहीं

    ReplyDelete

Post a Comment

सुस्वागतम!!

Popular posts from this blog

रामेश्वरम में

Azamgarh : History, Culture and People

इति सिद्धम

Most Read Posts

रामेश्वरम में

Bhairo Baba :Azamgarh ke

इति सिद्धम

Azamgarh : History, Culture and People

Maihar Yatra

विदेशी विद्वानों के संस्कृत प्रेम की गहन पड़ताल

...ये भी कोई तरीका है!

निज़ामाबाद और शीतला माता

पेड न्यूज क्या है?