आस का दीया [दीवाली की शुभ कामनाएं]

सूनी
हर गली पर
एक आस का दीया,
नयनों की
एक झलक से
तुम ने जला दिया ।

मन की यह
अमावस
उजाली हो गई,
परम उज्जवल
पर्व सी
दीवाली हो गई ।

सूखे
इस ठूंठ को
आतिश बना दिया ।
० राकेश 'सोहम'

Comments

  1. सुन्दर नवगीत है।
    दीपावली, गोवर्धन-पूजा और भइया-दूज पर आप सबको ढेरों शुभकामनाएँ!

    ReplyDelete
  2. बढ़ा दो अपनी लौ
    कि पकड़ लूँ उसे मैं अपनी लौ से,

    इससे पहले कि फकफका कर
    बुझ जाए ये रिश्ता
    आओ मिल के फ़िर से मना लें दिवाली !
    दीपावली की हार्दिक शुभकामना के साथ
    ओम आर्य

    ReplyDelete

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