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Showing posts from August, 2018

Kya Haal Sunaavan-- book review

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Hari Shanker Rarhi is with Narendra Mohan.Just now · 


समीक्षा     (नरेन्द्र मोहन की आत्मकथा - क्या हाल सुनावाँ) आत्मकथा के बहाने समय से विमर्श                                          - हरिशंकर राढ़ी 

हिंदी साहित्य में आत्मकथा लेखन का प्रारंभ निश्चित ही देर से हुआ किंतु समृद्धि तक पहुंचने में इसे बहुत समय नहीं लगा। आज साहित्य जगत के ही नहीं, कला के विभिन्न क्षेत्रों, खेलों और यहां तक की राजनीति जगत के व्यक्तित्वों ने आत्मकथा को अपने समय, समाज और जीवन की अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया है। संस्कृत साहित्य और संस्कार से शुरू भारतीय साहित्य आत्मप्रशंसा के बजाय लोक कल्याण और लोक जीवन को अधिक महत्त्व देता रहा, संभवतः इसी कारण भारतीय भाषाओं में आत्मकथा का अभाव रहा। प्राचीन साहित्यकारों के आत्मपरिचय के अभाव का दंश आज भी पूरा साहित्य जगत झेल रहा है। विश्व साहित्य के प्रभाव और आत्मकथ्य की बेचैनी ने हिंदी में भी आत्मकथा लेखन को बढ़ावा दिया और आज का हर लेखक या कवि आत्मकथा के बहाने उन सभी भावों तथा अनुभवों को उद्गार देना चाहता है जिसे वह अपने साहित्य में नहीं दे पाया है। कुछ आत्मकथाएं केवल आत्मपरिचय और न…

रति का अध्यात्म: खजुराहो

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हरिशंकर राढ़ी

यदि किसी को धरती पर कामक्रीडा का सौंदर्य] वैचारिक खुलापन,शारीरिक सुंदरता के प्रतिमान तथा कलात्मक जीवंतता एक साथ देखनी हो तो उसे खजुराहो की धरती पर एक बार जरूर आना चाहिए। ऐसे मंदिर शायद ही कहीं और हों जहां गर्भगृह में ईश्वरीय सत्ता के दूत] हिंदू मान्यता के कल्याणकारी देव विराजमान हों और दीवारों पर सृश्टि की सुंदरतम रचना नारी के लावण्यमयी अंगों का पुरुष संसर्ग में अनावृत्त चित्रण हो। आज से लगभग एक हजार साल पहले प्रेम,सौंदर्य और संभोग की पूजा करने वाला समाज हमारे इस तथाकथित विकसित समाज से कितना आगे और वैज्ञानिक सोच वाला था] इसका अंदाज खजुराहो की धरती पर फैली विशाल मंदिर शृंखला को देखकर सहज ही हो जाता है। चरित्र,वासना और गोपनीयता के नाम पर मनुष्य अपनी नैसर्गिकता और तार्किक सोच से कितना दूर हो गया है,इसका अनुमान यहीं लगाया जा सकता है। ऐसा भी नहीं है कि आज भी खजुराहो जाने वाला हर भारतीय पर्यटक इन कामक्रीडारत मूर्तियों को देखकर बहुत सहज महसूस करता है या इसे एक विकसित सोच का नमूना मानता है। कुछ लोग अभी भी पूरा भ्रमण किए ही वापस आ जाते हैं। हाँ,विभिन्न रिश्तों से बंधे परिवार का एक …

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