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कविता [] राकेश सोहम
चुनाव आ गए
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वे फिर द्वारे आ गए
भैया चुनाव आ गए।
पिछले बार हंसे थे
घर के भीतर घुसे थे
अम्मा के पाँव पड़े थे
बाद में कहाँ बिला गए ?
भैया चुनाव आ गए .......
अब की बार न भूलेंगे
आनंद के झूले झूलेंगे
दद्दा जी न कूलेंगे
हाथ जोड़कर जता गए !
भैया चुनाव आ गए .......
वे फिर द्वारे आ गए
ReplyDeleteभैया चुनाव आ गए।
पिछले बार हंसे थे
घर के भीतर घुसे थे
अम्मा के पाँव पड़े थे
बाद में कहाँ बिला गए ?
भैया चुनाव आ गए ....... बहुत खूब!
... एक बार फिर,
एक बार फिर,
५ साल का फेरा
धन्यवाद कविता जी
Deleteजो कविता पसंद आई
Amazing blog and very interesting stuff you got here! I definitely learned a lot from reading through some of your earlier posts as well and decided to drop a comment on this one!
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